Writing


Have been putting together a few lines since last night. Not sure if they’re any good, but the drive creating them felt like a sense of something strong.

Sometimes I wish the fish I was swimming with, just like the ocean, they were blue too
That way, when we swam, I won’t know anything about you
It scares me though, will they forget all about me too

बुझी बुझी आखों से देखते हो तुम
सोचते हो तुम कहीं छुप जाएं
छुप जाएं दूर, उस जहान में जहां डर ना हो ना हो बंदिशें
छुप जाएं उन बाहों में, उन आखों में, उनकी छाओं में जहां ज़िन्दगी बस ख़ुशी हो
जहां ना तो ये मायूसी हो और ना ये सूनी आवारगी हो

छुप जाएं उन पत्तियों की खिल खिलाहट में, उन भीनी हवाओं के झोकों में, उस गीली मिटटी की खुशबू में
कभी छुपें ऐसे कि बचपन की यादों में खो जाएँ
कभी छुपे ऐसे कि फिर कभी न मिल पाएँ

मेरे शब्दों में शायद वो बात ना हो, शायद अब वो एहसास ना हो
पर इन ख्यालों, ख्वाबों, लफ़्ज़ों, इन अल्फाजों को गर मैं कागज़ पे न उतारू
तो शायद आज जो मेरे साथ है, कल वो मौका भी मेरे पास ना हो


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